Wednesday, March 8, 2023

 

रौज़ने दिल भी मेहरबान बुझाते जाओ

जिंदगानी मेरी आसान बनाते जाओ


इंक़लाबात के इमकान मिटाते जाओ

फिर न उट्ठे कोई तूफ़ान दबाते जाओ


आज तो खुल के मिलो पास रहो बात करो

इस मुलाक़ात को ज़ीशान बनाते जाओ


रस्म रोने की बची और सिसकने का रिवाज

इश्क़ के आखिरी अरकान निभाते जाओ


याद करने का अहद है न भुलाने की क़सम

कोई अपराध नहीं था कि छुपाते जाओ


उम्र की क़ैद ने चंदां तो उतारे होंगे

रह गए कौन से एहसान गिनाते जाओ


दस्तखत किसके हैं काफ़िर के अदम नामे पर

कौन है नाशिरे फरमान सुनाते जाओ

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