तूने बर्बाद हमारा चमनिस्तान किया
हमने आबाद तिरा कुर्रःए-वीरान किया
तूने क्या ख़ाक किया ख़ाक को इंसान किया
हमने जो संग तराशा उसे भगवान् किया
जान दी तूने सरासर मुझे ममनून किया
मैंने दी जान बराबर तेरा एहसान किया
कभी आईनो शरीयत कभी कुर'आनो हदीस
ख़ुद परेशान रहे जी को परेशान किया
आज फिर हज़रते वाईज़ से किया मैंने सवाल
क्या ग़ज़ब तूने खुलूसे दिले नादान किया
ज़ीस्त और मौत के इस खेल का मक़सद क्या है
मुद्दतों ऐसे सवालात ने हैरान किया
हूं तो बीमार बहुत फिर भी गुनहगार नहीं
आबे गंगा से मुसलसल मैंने अशनान किया
गूनः गूनः ही भले रंगे चमन बूए चमन
तुझको सौगंध जो काफ़िर को मुसलमान किया
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