Monday, May 10, 2010

अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद

अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद

अब बहकने का वो अंदाज़ नहीं है तेरा
अब चहकने का वो अंदाज़ नहीं है तेरा
अब कहाँ आती है खुशबू तेरे पैराहन से
अब महकने का वो अंदाज़ नहीं है तेरा
अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद

अब मेरे नाम पे ढलते नहीं गेसू तेरे
अब मेरे हाथ पे जलते नहीं आंसू तेरे
अब कभी दूर से आवाज़ नहीं देती है
अब मुझे देख के खुलते नहीं बाजू तेरे
अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद

अब कई रोज़ मेरे साथ नहीं होती है
अब कई रोज़ कोई बात नहीं होती है
अब बहुत कम ही मिला करती है तनहा मुझसे
अब कई रोज़ मुलाकात नहीं होती है
अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद

अब वो तम्बीह वो ताकीद वो इसरार नहीं
अब वो गुफ्तार नहीं शोखिये गुफ्तार नहीं
अब भी मुझमें वही सौदाये जवां  है लेकिन
अब तुझे प्यार नहीं, हाय तुझे प्यार नहीं
अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद

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