ये कैसे खाली से दिन हैं
खाली खाली शाम है क्यों
फूल परिंदे खेल तमाशे
फिर दिल बेआराम है क्यों
जिस्म जलाती गर्म हवाएं
धूल उड़ाती राहगुज़र
गहरी गहरी नाउम्मीदी
बिखरी बिखरी शाम है क्यों
समझा था मैं भूल गया हूँ
मुद्दत गुजरी याद किये
कैसे हो तुम? मेरे ज़हन में
आज तुम्हारा नाम है क्यों
तुमने जाते जाते जितनी
बातें थीं सब कह दी थीं
मेरे दिल में एक अधूरी
बात बराए नाम है क्यों
कैसी कैसी ख़बरें आयीं
कैसी कैसी बात हुई
क्या क्या गुजरी क्या बतलाऊँ
नाम है क्यों बदनाम है क्यों
खाली खाली शाम है क्यों
फूल परिंदे खेल तमाशे
फिर दिल बेआराम है क्यों
जिस्म जलाती गर्म हवाएं
धूल उड़ाती राहगुज़र
गहरी गहरी नाउम्मीदी
बिखरी बिखरी शाम है क्यों
समझा था मैं भूल गया हूँ
मुद्दत गुजरी याद किये
कैसे हो तुम? मेरे ज़हन में
आज तुम्हारा नाम है क्यों
तुमने जाते जाते जितनी
बातें थीं सब कह दी थीं
मेरे दिल में एक अधूरी
बात बराए नाम है क्यों
कैसी कैसी ख़बरें आयीं
कैसी कैसी बात हुई
क्या क्या गुजरी क्या बतलाऊँ
नाम है क्यों बदनाम है क्यों
No comments:
Post a Comment