Sunday, May 9, 2010

क्या क्या गुजरी क्या बतलाऊँ

ये कैसे खाली से दिन हैं
खाली खाली शाम है क्यों
फूल परिंदे खेल तमाशे
फिर दिल बेआराम है क्यों

जिस्म जलाती गर्म हवाएं
धूल उड़ाती राहगुज़र
गहरी गहरी नाउम्मीदी
बिखरी बिखरी शाम है क्यों

समझा था मैं भूल गया हूँ
मुद्दत गुजरी याद किये
कैसे हो तुम? मेरे ज़हन में
आज तुम्हारा नाम है क्यों

तुमने जाते जाते जितनी
बातें थीं सब कह दी थीं
मेरे दिल में एक अधूरी
बात बराए नाम है क्यों

कैसी कैसी ख़बरें आयीं
कैसी कैसी बात हुई
क्या क्या गुजरी क्या बतलाऊँ
नाम है क्यों बदनाम है क्यों

No comments: