Sometimes I do write. Most of the times I can't even write a line however hard I try. So I have left trying. They come, I polish them and post here. Enjoy, if you like.
Tuesday, May 11, 2010
सालगिरह
Monday, May 10, 2010
साहिर यूँ भी कह सकता था
चलो इक बार फिर से दोस्ती दोहराएँ हम दोनों
मैं फिर तुमसे कोई उम्मीद रक्खूं दिलनवाज़ी की
व तुम मेरी तरफ देखो ग़लत अंदाज़ नज़रों से
मेरे दिल की तमन्ना झिलमिलाये मेरी बातों में
बयां हो फिर तुम्हारी कशमकश का राज़ नज़रों से
चलो इक बार फिर से ..................
तुम्हें क्यों कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
मुझे क्यों लोग कहते हैं कि ये जलवे पराए हैं
मेरे हमराह क्यों रुस्वाइयां हैं मेरे माज़ी की
तुम्हारे साथ क्यों गुजरी हुई रातों के साए हैं
चलो एक बार फिर से .............
त'आर्रुफ़ रोग बन जाए तो उसको फिर नया कर दें
त'आल्लुक़ बोझ बन जाए तो उसको हल्का सा कर दें
वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक खूबसूरत मोड़ दे कर इब्तिदा कर दें
चलो इक बार फिर से........
अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद
अब बहकने का वो अंदाज़ नहीं है तेरा
अब चहकने का वो अंदाज़ नहीं है तेरा
अब कहाँ आती है खुशबू तेरे पैराहन से
अब महकने का वो अंदाज़ नहीं है तेरा
अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद
अब मेरे नाम पे ढलते नहीं गेसू तेरे
अब मेरे हाथ पे जलते नहीं आंसू तेरे
अब कभी दूर से आवाज़ नहीं देती है
अब मुझे देख के खुलते नहीं बाजू तेरे
अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद
अब कई रोज़ मेरे साथ नहीं होती है
अब कई रोज़ कोई बात नहीं होती है
अब बहुत कम ही मिला करती है तनहा मुझसे
अब कई रोज़ मुलाकात नहीं होती है
अब किसी और से है तुझको मुहब्बत शायद
अब वो तम्बीह वो ताकीद वो इसरार नहीं
अब वो गुफ्तार नहीं शोखिये गुफ्तार नहीं
अब भी मुझमें वही सौदाये जवां है लेकिन
अब तुझे प्यार नहीं, हाय तुझे प्यार नहीं
Sunday, May 9, 2010
क्या क्या गुजरी क्या बतलाऊँ
खाली खाली शाम है क्यों
फूल परिंदे खेल तमाशे
फिर दिल बेआराम है क्यों
जिस्म जलाती गर्म हवाएं
धूल उड़ाती राहगुज़र
गहरी गहरी नाउम्मीदी
बिखरी बिखरी शाम है क्यों
समझा था मैं भूल गया हूँ
मुद्दत गुजरी याद किये
कैसे हो तुम? मेरे ज़हन में
आज तुम्हारा नाम है क्यों
तुमने जाते जाते जितनी
बातें थीं सब कह दी थीं
मेरे दिल में एक अधूरी
बात बराए नाम है क्यों
कैसी कैसी ख़बरें आयीं
कैसी कैसी बात हुई
क्या क्या गुजरी क्या बतलाऊँ
नाम है क्यों बदनाम है क्यों