अन्फ़ास के परिंदे बरहम नहीं रहेंगे
फ़िकरे हयातो ग़महाए ग़म नहीं रहेंगे
जानम तुम्हारे शैदाई कम नहीं रहेंगे
रह जाएगा ज़माना कल हम नहीं रहेंगे
तन्हाईए क़यामत और यह हुजूमे दुनिया
हाए हमारी क़िस्मत वाए रुसूमे दुनिया
दुनिया के मुंसिफ़ों ने बस एक रात दी है
यह रात आख़िरी है कल हम नहीं रहेंगे
रेगे रवां के पीछे शामो सहर गँवाए
परवाज़ की तमन्ना में बालो पर गँवाए
ख्व़ाबे कुहन की मंज़िल और काविशों का हासिल
यह रात है हमारी कल हम नहीं रहेंगे
लेकर महकते गेसू फिर एक बार आओ
हुस्नो शबाब लेकर दीवानावार आओ
आओ तिपां जिगर से उठने लगा धुंआ सा
बुझने दो चंद शोले कल हम नहीं रहेंगे
अपनी उदास आँखों में डूबने दो शब भर
इन दिल फ़रेब होंठों को चूमने दो शब भर
शब भर समेटने दो अपने बदन की ख़ुशबू
जी भर के देखने दो कल हम नहीं रहेंगे
नक्शो निगार छूकर जलने दो उँगलियों को
सरता क़दम बहकती चलने दो उँगलियों को
तरसी हुई जवानी महरूम रह न जाए
पीने दो मै शहाबी कल हम नहीं रहेंगे
बस और ज़िन्दगानी आशुफ़्त:सर न होगी
इस शब के बाद अपनी कोई सहर न होगी
मेराजे वस्ल क्या है क्या है रमूज़े हिज्राँ
ज़ाहिर कभी न होगा कल हम नहीं रहेंगे
कुछ देर में फ़लक का गोश: सुलग उठेगा
शबनम चमक उठेगी गुंच: महक उठेगा
तुमको सबा हमारे पहलू से ले चलेगी
होंगी हज़ार बातें कल हम नहीं रहेंगे
बेताब खैर मक़दम करने को हैं बहारें
देखो वो दूर तक हैं नगमात की क़तारें
जाओ तुम्हारी दुनिया आवाज़ दे रही है
हाफ़िज़ ख़ुदा तुम्हारा कल हम नहीं रहेंगे
ख़ुश आमदीद कहना फैला के अपना दामन
कोशिश अगर करोगी होंगे चराग़ रौशन
अफ़सोस भी हमारा तुम भूल कर न करना
कल हम नहीं रहेंगे कल हम नहीं रहेंगे
No comments:
Post a Comment