Saturday, January 6, 2024

 इक साअते गुम फेर के सा'ई नहीं देता 

कहता है कि जा मैने चुराई नहीं देता


पूछे है फ़हम कौन है पोशीदा नज़र से

ढूंढे है नज़र जिसको दिखाई नहीं देता


सरवत का अंधेरा है कि पर्दे हैं अना के

इस हाथ को वो हाथ सुझाई नहीं देता


फुर्सत नहीं बेटी को मेरा हाल जो पूछे

बेटा भी मुझे अपनी कमाई नहीं देता


हंगामे तरक्की नहीं हंगामा बपा है

इस शोर में दुनिया को सुनाई नहीं देता


आकाश से धरती का नज़म देखने वाले

बूढ़े हुए अब उनको दिखाई नहीं देता 


बदकारो खातावार खड़े चीख़ रहे हैं

चुपचाप है मासूम सफ़ाई नहीं देता


करता हूं वही जी में जो आ जाए है मेरे

काफ़िर हूं अकीदों की दुहाई नहीं देता

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