रंगो-आहंग में तू हमसे छुपाता क्या है
देख लेने दे मुनाफ़िक़ तिरा जाता क्या है
सामने फ़न है कि फ़नकार है मालूम नहीं
यह समझ में नहीं आता नज़र आता क्या है
एक दिन पर्दानशीं मेरा जुनूने-दीदार
रंग तो लाएगा अंदेश: है लाता क्या है
आबो-गिल मेरे सने हिर्सो-हवा से तूने
कारनामों पे मिरे हश्र उठाता क्या है
क्यों लगाता है मिनारों से मुझे आवाज़ें
बात करनी ही नहीं है तो बुलाता क्या है
उनसे कर बात जिन्हें चाहिए फ़िर्दौसो-नसीम
तारिके-ख़ुल्द को हूरों से बनाता क्या है
रोज़ आता है तेरे दार में गिन कर लेकिन
सर तो ख्वाहाने बुतां है यह झुकाता क्या है
और काफ़िर तुझे मिल जाएंगे ईमान फरोश
ये नगीने मुझे हर रात दिखाता क्या है
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