Tuesday, June 1, 2021

जूनी के लिए

कौन कहता है कि आप और हम कभी 

तितलियों से बात कर सकते नहीं 


कौन कहता है कि लफ़्ज़ों के बग़ैर

गीत गाए जा नहीं सकते कभी


कौन कहता है धनक के रंग से 

आसमां पर दिल बना सकते नहीं 


कौन कहता है कि कुदरत आपको 

मावराई हुस्न दिखलाती नहीं


कौन कहता है कि परियाँ अर्श की 

आ नहीं सकतीं कभी आग़ोश में


कौन कहता है कि आँगन प्यार का 

जुगनुओं से भर नहीं सकता कभी 


कौन कहता है पहाड़ी रागनी

घर हमारे जन्म ले सकती नहीं 


कौन कहता है कि फूलों की महक 

पालने में गुनगुना सकती नहीं


कौन कहता है कि पूरी कायनात 

बे महाबा खिलखिला सकती नहीं 


कौन कहता है मसीहाई कभी 

लौट कर दुनिया में आ सकती नहीं


कौन हैं ये लोग इतने वाहियात

बात फैलाते हैं बेसिर पैर की


उन तही मग्ज़ों को लेकर आइए

और हमारी बेटियाँ दिखलाइए

Friday, March 26, 2021


 रंगो-आहंग में तू हमसे छुपाता क्या है

देख लेने दे मुनाफ़िक़ तिरा जाता क्या है 


सामने फ़न है कि फ़नकार है मालूम नहीं 

यह समझ में नहीं आता नज़र आता क्या है


एक दिन पर्दानशीं मेरा जुनूने-दीदार

रंग तो लाएगा अंदेश: है लाता क्या है


आबो-गिल मेरे सने हिर्सो-हवा से तूने

कारनामों पे मिरे हश्र उठाता क्या है


क्यों लगाता है मिनारों से मुझे आवाज़ें

बात करनी ही नहीं है तो बुलाता क्या है


उनसे कर बात जिन्हें चाहिए फ़िर्दौसो-नसीम

तारिके-ख़ुल्द को हूरों से बनाता क्या है


रोज़ आता है तेरे दार में गिन कर लेकिन

सर तो ख्वाहाने बुतां है यह झुकाता क्या है


और काफ़िर तुझे मिल जाएंगे ईमान फरोश

ये नगीने मुझे हर रात दिखाता क्या है