Thursday, May 7, 2020

अभी मैं जिंदा हूँ


ऐ दैरो हरम के मुख्तारो
ऐ मुल्को जुबां के सरदारो

सुन लो कि अभी मैं जिंदा हूँ

ऐ ताज बसर मीज़ान बकफ़
तुम अदलो हक़ीक़त भूल गए
काग़ज़ की रसीदों में लिखकर
इंसान की क़ीमत भूल गए
संभलो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

माना कि तबीयत भारी है
और भूख बदन पर तारी है
पानी भी नहीं शिरयानों में
पर सांस अभी तक जारी है
ठहरो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

सुन लो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

ऐ सा'द सुखन फर्ज़ान:क़लम
ये शोरिशे 'दानम' बंद करो
रोते भी हो तुम पैसों के लिए
रहने दो ये मातम बंद करो
बख्शो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

सुन लो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

आईने मईशत किसने लिखे
आदाबे सियासत किसने लिखे
है जिनमें तुम्हारी आग़ाई
वो बाबे शरीयत किसने लिखे
लिक्खो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

सुन लो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

ऐ पंदगराने दीनो धरम
पैग़म्बरो का'बा मेरे हैं
मंदिर भी मेरे भगवान मेरे
गुरूद्वारे कलीसा मेरे हैं
निकलो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

सुन लो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

कह दो जाकर सुल्तानों से
ज़र्दारों से ऐवानों से
पैकारे तमद्दुन के हामी
बे नंग सियासतदानों से
कह दो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

सुन लो कि अभी मैं ज़िन्दा हूँ

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