नज़राना मेरा गर्चे बहुत ख़ास नहीं है
इस दिल सी कोई चीज़ तेरे पास नहीं है
उठता है धुआँ क्यों मेरे आशुफ़्ता नफ़स से
क्या आग है सीने में मेरे साँस नहीं है
धड़केगा तेरे नाम से खुशबू से अदा से
दिल है ये रवायात की मीरास नहीं है
दिन कैसे गुज़रता है सफ़रकारे-जुनूँ का
ऐ शामे-बहारां तुझे एहसास नहीं है
आ जाती है तू ख़्वाब में जिस रात सँवर के
फिरदौस भी उस रात की अक्कास नहीं है
दुनिया की वही फ़िक्र करें जिन की है दुनिया
तू पास नहीं कुछ भी मेरे पास नहीं है
कुछ दे न सकूँ आ तुझे सजदा तो करूँगा
काफ़िर की जबीं ख़ान-ए- इफ़लास नहीं है
No comments:
Post a Comment