Wednesday, July 21, 2010

आधारशिला का गीत

उन्मुक्त धरा उन्मुक्त गगन

निर्बाध गमन निर्दोष वचन

स्वाधीन ह्रदय मन प्राणों की

आधारशिला आधारशिला


जग चेतन और अचेतन के

हर कण कण में साकार हैं हम

पर्वत भी हमीं सागर भी हमीं

धरणी के प्राणाधार हैं हम

हम हैं सारे संधानों की

आधारशिला आधारशिला


वह ज्ञान हमें दो करूणाकर

उर के चिर बंधन खुल जाएँ

मिल जाएँ ह्रदय से आके ह्रदय

सीमा रेखाएं धुल जाएँ

सब के स्वप्निल सोपानों की

आधारशिला आधारशिला


आरंभ हमारे हाथों से

रचना ऐसे संसार की हो

विश्वास का हो जिसमें बंधन

और भाषा केवल प्यार की हो

नवयुग के नवनिर्माणों की

आधारशिला आधारशिला

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