Tuesday, July 10, 2018

नज़राना मेरा गर्चे बहुत ख़ास नहीं है
इस दिल सी कोई चीज़ तेरे पास नहीं है 

उठता है धुआँ क्यों मेरे आशुफ़्ता नफ़स से 
क्या आग है सीने में मेरे  साँस नहीं है 

धड़केगा तेरे नाम से खुशबू से अदा से 
दिल है ये रवायात की मीरास  नहीं है 

दिन कैसे गुज़रता है सफ़रकारे-जुनूँ  का 
ऐ शामे-बहारां तुझे एहसास नहीं है 

आ जाती है तू ख़्वाब  में जिस रात सँवर के 
फिरदौस भी उस रात की अक्कास नहीं है 

दुनिया की वही फ़िक्र करें जिन की है दुनिया 
तू पास नहीं कुछ भी मेरे पास नहीं है 

कुछ दे न सकूँ आ तुझे सजदा तो करूँगा 
काफ़िर की जबीं ख़ान-ए- इफ़लास नहीं है