उन्मुक्त धरा उन्मुक्त गगन
निर्बाध गमन निर्दोष वचन
स्वाधीन ह्रदय मन प्राणों की
आधारशिला आधारशिला
जग चेतन और अचेतन के
हर कण कण में साकार हैं हम
पर्वत भी हमीं सागर भी हमीं
धरणी के प्राणाधार हैं हम
हम हैं सारे संधानों की
आधारशिला आधारशिला
वह ज्ञान हमें दो करूणाकर
उर के चिर बंधन खुल जाएँ
मिल जाएँ ह्रदय से आके ह्रदय
सीमा रेखाएं धुल जाएँ
सब के स्वप्निल सोपानों की
आधारशिला आधारशिला
आरंभ हमारे हाथों से
रचना ऐसे संसार की हो
विश्वास का हो जिसमें बंधन
और भाषा केवल प्यार की हो
नवयुग के नवनिर्माणों की
आधारशिला आधारशिला