Sunday, February 25, 2024

सूखा

रोज़ बरसता नैनों का जल

रोज़ उठा सरका देता हल

रूठ गए जब सूखे बादल 

क्या जोते क्या बोवे पागल


सागर ताल बला से सूखे

हार न जीते प्यासे सूखे                        हार= खेत

दान दिया परसाद चढ़ाया

फिर काहे चौमासे सूखे                    चौमासा = वर्षा ऋतु


धूप ताप से बर गई धरती                    बरना = जलना

अबके सूखे मर गई धरती

एक बाल ना एक कनूका                    बाल = अनाज की बाली,  कनूका = दाना

आग लगी परती की परती                   आग लगी = औरतों की एक गाली 


भूखी आंखें मोटी मोटी

हाड़ से चिपकी सूखी बोटी                हाड़ = हड्डी

सूखी साखी उंगलियों में

सूखी चमड़ी सूखी रोटी


सूख गई है अमराई भी

सूख गई है अंगनाई भी

तीर सी लगती है छाती में

सूख गई है पुरवाई भी


गड्डे गिर्री डोरी सूखी                        गड्डा = खड़ी गाड़ी गयी मोटी लकड़ी,    गिर्री = गरारी

गगरी मटकी मोरी सूखी                    मोरी = नाली

पनघट पर क्या लेने जाए

इंतज़ार में गोरी सूखी


मावर लाली बिंदिया सूखी                मावर = महावर

धीरे धीरे निंदिया सूखी

आंचल में पलने वाली फिर 

आशा चिंदिया चिंदिया सूखी


सूख चुके सब ज्वारों के तन            जवारे = बैलों की जोड़ी

सूख चुके सब गायों के थन

काहे का घी कैसा मक्खन

सूख चुके सब हांडी बर्तन


फूलों के परखच्चे सूखे

पके नहीं फल कच्चे सूखे

जो बिरवान नहीं सूखे थे                बिरवान = पेड़

सूखे अच्छे अच्छे सूखे


सूखा भादों सूखा सावन

सूखी चोली सूखा दामन 

गौने के सपने मुरझाए

सूखा दुल्हनिया का जोबन


जातें, मेले, झांकी सूखी                    जात = स्थानीय देवताओं के उत्सव

दीवाली बैसाखी सूखी 

चौथ मनी ना होली भीगी

चन्दन रोली राखी सूखी


बस कोयल की कूक न सूखी

घड़ी घड़ी की हूक न सूखी

सूखे चेहरे सूखे पंजर 

लेकिन पेट की भूक न सूखी