Wednesday, January 22, 2020

आए हैं आज अपने ही मेहमां बने बने
वीरान क्यूँ रहें तेरे ज़िन्दां बने बने

पूछो न कौन थे मेरे आबा-ओ-अम्बिया'
कुछ याद ही नहीं मुझे इनसां बने बने

तस्वीर से हमारी न पहचान हो सके
फिरते हैं कब के सूरते जानां बने बने

ले लो मेरा वतन मेरा मशरब मेरी ज़बां
हिन्दोस्तां बना लो हुकमरां बने बने

दोनों तरफ हैं वसवसे दोनों तरफ गिले
कैसे निभेगी दोस्तो नालां बने बने

हिंदी कलाम करता है काफ़िर कभी कभी
थोड़े से दिन हुए हैं मुसलमां बने बने